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तुम पुकारती रहो

Posted On: 10 Apr, 2011 Others में

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आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो,
नैनों में आँसू भर के,
यादों को सँवारती रहो!

समझा लिया मन को कि,
तुम ना हो खडी़ राहों में,
आशा नहीं मेरे इंतजार का,
आज ना हो तुम मेरी बाहों में!

आया ना ख्वाबों में भी इस बार,
कि तुम रात जग के गुजारती रहो!

आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो!

कब से जिन्हे ना सुन पाया,
जिस प्रेम से तुमने बुलाया,
चाहा कि अब जिद छोड़ दूँ,
राहों को अपने मोड़ लूँ!

पर क्या करुँ आ ना सका,
कि तुम बाट निहारती रहो!

आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो!

छलक आये उर के प्यार,
यूँ नैनो में दो बूँद बन के,
नैना तो बरसे,गला भी भर गया,
पुकारना तेरा इक गुँज बन के!

ठोकर पडा़ यूँ गिर गया,
कि तुम सम्भालती रहो!

आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो!

क्यों तुमको मैने रुला दिया,
ये सोच के मन घबराया है,
सीमाओं में क्यों प्यार बँधा,
मेरा प्यार तुने ठुकराया है!

यादे रह-रह कर बीते दिनों की,
किस्से क्यों दुहराती है,
अमर कहानी प्यार की हमारी,
कि तुम सुनाती रहो!

आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो!

मेरा छिपना,तुमको रुलाना,
कुछ देर में फिर बाहर आना,
करना वही फिर से बहाना,
तेरा रुठना और मेरा मनाना!

थम गया बस याद कर के,
कि तुम भी याद करती रहो!

आया नहीं मै जानकर,
कि तुम पुकारती रहो!

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
April 10, 2011

जिस प्रेम से तुमने बुलाया, चाहा कि अब जिद छोड़ दूँ, राहों को अपने मोड़ लूँ! पर क्या करुँ आ ना सका, कि तुम बाट निहारती रहो! सत्यम जी ये प्रेम भी अजीब है कभी छिपना कभी रुलाना क्या क्या कशिश है इसमें तरह तरह के रंग आप ने पिरोया सुन्दर अभिव्यक्ति धन्यवाद भ्रमर५

abodhbaalak के द्वारा
April 10, 2011

Satyam ji bahut hi sundar kavita, pyar me doobe parntu ek doosre se ………….. aise hi likhte rahen http://abodhbaalak.jagranjunction.com


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