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"इक बात कहो-Valentine Contest"

Posted On: 7 Feb, 2011 Others में

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हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी,
अश्रु नैन से जिन्हें सिंचते थे,
उन नैनों को क्या समझाओगी।

दो नयन जो कब से प्रतिक्षा में खड़े थे,
उन नैनों को कैसे बहलाओगी,
सावन का बादल बरसेगा,
प्यार उस प्यास को तरसेगा,
ह्रदय व्याकुल हो जायेगा,
गीत वही फिर गायेगा,
कैसे उन लम्हों को भूल पाओगी?

हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी।

पता है यह प्रश्न थोड़ा,
उर को रुलाने वाला है,
नैनों में बसी तेरी छवि को,
कभी ना भूलाने वाला है।

पर याद आयेगी जब मेरी,
क्या खुद को रोक पाओगी,
अपने दिल को कैसे दिलासा दिलाओगी?

हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी।

मुझसे जो तुमने कह दिया,
मेरे दिल को झुठा दिलासा दिया,
मेरे साथ जीवन गुजारोगी,
पर आज तुमने ये क्या किया।

माना मुझे भूल जाओगी,
यादों को कैसे बिसराओगी,
दूर जा के भी मेरी जिंदगी से,
मेरे ख्वाबों में रोज आओगी।

हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी।

मेरी तो कुछ ऐसी उलझन है,
जो तुमसे मै ना कह सका,
पर कैसे कहूँ तेरे बिन तो मै,
इक पल भी ना रह सका।

तुम तो हमारे प्यार की बगिया,
में फूलों के संग हो,
लेकिन मै अपनी क्या कहूँ,
जो अपनी बेवजह बरसती,
आँसूओं से ही दंग है।

तेरे लिए तो पतवार था मै,
अब खुद किनारा ढ़ुँढ़ पाओगी।

हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी।

इंतजार मैने तेरा बहुत किया,
पर जब तु मुझको मिल गयी,
मेरी नियती ही शायद ऐसी है,
तु मेरी परायी सी बन गयी।

बस दो दिन का प्यार जवाँ,
दिल में बसाएँ जी लूँगा,
तुम ना आओगी अब कभी,
ये बात खुद से कह लूँगा।

पर ये बताओ क्या तुम भी,
मेरे लिए इंतजार कर पाओगी,
दो नयन जो कब से प्रतिक्षा में खड़े थे,
इन नैनों को कैसे बहलाओगी?

हे प्रियतमा! इक बात कहो,
तुम ये पावन प्यार भूल जाओगी।

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 8, 2011

सत्यम जी नमस्कार, सुन्दर भावनात्मक प्रश्नों की बौछार करती आपकी ये पोस्ट,धन्यवाद!

    satyam shivam के द्वारा
    February 8, 2011

    धन्यवाद धर्मेश जी……….ऐसे ही मेरा मार्गदर्शन करते रहे।


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