*काव्य-कल्पना*

Just another weblog

24 Posts

43 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4185 postid : 12

"तुम हो अब भी-Valentine Contest"

Posted On: 6 Feb, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मौन मेरा स्नेह अब भी,
जो दिया,तुमसे लिया मै।

प्यार मेरा चुप है अब भी,
क्यों किया,जो है किया मै।

भूल से हुई इक खता,
मैने रुलाया खुब तुमको,
खुद भी रोया,
कह ना पाया,
नैन मेरा ढ़ुँढ़े उनको।

तुम कही हो,मै कही हूँ,
तुम ना मेरी,मै नहीं हूँ।

पर है वैसा ही सुहाना,
प्यार का मौसम तो अब भी।

साथ तेरा छोड़ दामन,
प्यार का बंधन छुड़ाया,
रुठ चुकी है खुशियाँ अपनी,
प्यार हमारा लुट न पाया।

ख्वाबों में फिर हर रात ही,
न जाने क्यों आती हो तुम तो अब भी।

राहे मुझसे पुछती है,
है कहा तेरा वो अपना,
साथ जिसके रोज था तु,
खो गया क्यों बन के सपना।

तु गया है भूल या उसने ही दामन है चुराया,
पर मेरे जेहन में वैसी ही,
कुछ प्यारी यादें सीमटी है अब भी।

माना है मैने कि तुम हो दूर मेरे,
दूर हो के पास हो तुम साथ मेरे।

मै तुम्हे अब देखता हूँ आसमां में,
चाँद में,तारों में,
हर जगह जहा में।

सब में बस तेरी ही तस्वीर दिखती,
हर तस्वीर तुम्हारी है ये पूछती।

मै नहीं तेरी प्रिया कर ना भरोसा,
दूर रह वरना तु खायेगा फिर धोखा,
मै उन्हें बस ये ही कह के टालता हूँ,
साये से तेरा अपना वजूद निकालता हूँ।

कोई ना जाने किसी को क्या पता है?
मेरे दिल के घर में तो तुम हो अब भी।

बीती हुई हर बात में,
अपनी सभी मुलाकात में,
थे चंद सपने जो थे जोड़े तेरे मेरे साथ ने।

उन चाँदनी हर रात में,
भींगी हुई बरसात में,
मेरे आज में और कल में,
दबी दबी सी जिक्र तुम्हारी,
एहसास दिलाती तुम हो अब भी।

| NEXT



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 6, 2011

मुझे रचना अच्छी लगी पर एक बार और पढना पड़ेगा ….पर ये कह सकता हु सत्यम जी आपकी कलम में बहुत खूबसूरती है.. लिखते रहिये … आपमें एक बेहतरीन कवि है

    satyam shivam के द्वारा
    February 7, 2011

    धन्यवाद निखील जी……..यूँही हरदम मेरा मनोबल बढ़ाते रहे।

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 6, 2011

सुंदर रचना ……. बधाई……. पर इतनी सारी रचनाएँ एक साथ नहीं पोस्ट करें……… सबकी प्रतिकृया एक मे ही देनी पड़ती है…….. अन्यथा बाकी लोगों के लेख पढ़ने का समय नहीं मिले………..

    satyam shivam के द्वारा
    February 7, 2011

    पियुष जी,धन्यवाद…….मैने पहली बार पोस्ट डाला था…..सो एक ही बार में इतना कर दिया…………..आपके सुझावों का आमंत्रण है।


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran